Sunday, 15 February 2015


मुश्किल है अपना मेल प्रिये
ये प्यार नहीं है खेल प्रिये
तुम एम.ए. फर्स्ट डिवीजन हो
मैं हुआ मैट्रिक फेल प्रिये
तुम फौजी अफसर की बेटी
मैं तो किसान का बेटा हूं
तुम रबडी खीर मलाई हो
मैं तो सत्तू सपरेटा हूं
तुम ए.सी. घर में रहती हो
मैं पेड़ के नीचे लेटा हूं
तुम नई मारूति लगती हो
मैं स्कूटर लम्ब्रेटा हूं
इस तरह अगर हम छुप छुप कर
आपस में प्यार बढाएंगे
तो एक रोज तेरे डैडी
अमरीश पुरी बन जाएंगे
सब हड्डी पसली तोड. मुझे
भिजवा देंगे वो जेल प्रिये
मुश्किल है अपना मेल प्रिये
ये प्यार नहीं है खेल प्रिये
तुम अरब देश की घोडी हो
मैं हूं गदहे की नाल प्रिये
तुम दीवाली का बोनस हो
मैं भूखों की हडताल प्रिये
तुम हीरे जडी तस्तरी हो
मैं एल्युमिनियम का थाल प्रिये
तुम चिकेन, सूप, बिरयानी हो
मैं कंकड वाली दाल प्रिये
तुम हिरन चौकडी भरती हो
मैं हूं कछुए की चाल प्रिये
तुम चन्दन वन की लकडी हो
मैं हूं बबूल की छाल प्रिये
मैं पके आम सा लटका हूं
मत मारो मुझे गुलेल प्रिये
मुश्किल है अपना मेल प्रिये
ये प्यार नहीं है खेल प्रिये
मैं शनिदेव जैसा कुरूप
तुम कोमल कंचन काया हो
मैं तन से, मन से कांशी हूं
तुम महाचंचला माया हो
तुम निर्मल पावन गंगा हो
मैं जलता हुआ पतंगा हूं
तुम राजघाट का शांति मार्च
मैं हिन्दू-मुस्लिम दंगा हूं
तुम हो पूनम का ताजमहल
मैं काली गुफा अजन्ता की
तुम हो वरदान विधाता का
मैं गलती हूं भगवन्ता की
तुम जेट विमान की शोभा हो
मैं बस की ठेलमपेल प्रिये
मुश्किल है अपना मेल प्रिये
ये प्यार नहीं है खेल प्रिये
तुम नई विदेशी मिक्सी हो
मैं पत्थर का सिलबट्टा हूं
तुम ए.के. सैंतालिस जैसी
मैं तो इक देसी कट्टा हूं
तुम चतुर राबडी देवी सी
मैं भोला-भाला लालू हूं
तुम मुक्त शेरनी जंगल की
मैं चिड़ियाघर का भालू हूं
तुम व्यस्त सोनिया गांधी सी
मैं वी.पी. सिंह सा खाली हूं
तुम हंसी माधुरी दीक्षित की
मैं पुलिस मैन की गाली हूं
गर जेल मुझे हो जाए तो
दिलवा देना तुम बेल प्रिये
मुश्किल है अपना मेल प्रिये
ये प्यार नहीं है खेल प्रिये
मैं ढाबे के ढांचे जैसा
तुम पांच सितारा होटल हो
मैं महुए का देसी ठर्रा
तुम चित्रहार का मधुर गीत
मैं कृषि दर्शन की झाडी हूं
तुम विश्व सुंदरी सी महान
मैं ठेलिया छाप कबाडी हूं
तुम सोनी का मोबाइल हो
मैं टेलीफोन वाला चोंगा
तुम मछली मानसरोवर की
मैं सागर तट का हूं घोंघा
दस मंजिल से गिर जाउंगा
मत आगे मुझे ढकेल प्रिये
मुश्किल है अपना मेल प्रिये
ये प्यार नहीं है खेल प्रिये
तुम जयप्रदा की साडी हो
मैं शेखर वाली दाढी हूं
तुम सुषमा जैसी विदुषी हो
मैं लल्लू लाल अनाडी हूं
तुम जया जेटली सी कोमल
मैं सिंह मुलायम सा कठोर
तुम हेमा मालिनी सी सुंदर
मैं बंगारू की तरह बोर
तुम सत्ता की महारानी हो
मैं विपक्ष की लाचारी हूं
तुम हो ममता जयललिता सी
मैं क्वारा अटल बिहारी हूं
तुम संसद की सुंदरता हो
मैं हूं तिहाड की जेल प्रिये
मुश्किल है अपना मेल प्रिये
ये प्यार नहीं है खेल प्रिय


Friday, 13 February 2015


एक हसीन लडकी राजा के
दरबार में डांस कर
रही थी..
.
(राजा बहुत बदसुरत था)
.
लडकी ने राजा से एक
एक सवाल की इजाजत
मांगी...
.
राजा ने कहा, 'चलो पुछो.'
.
लडकी ने कहा,'जब
हुसन बंट रहा था
तब आप कहां
थे..??
.
राजा ने गुस्सा नही
किया बल्कि
मुस्कुराते हुवे कहा
'जब तुम हुस्न की लाइन्
में खडी हुस्न ले
रही थी,
.
तो में किस्मत की
लाइन में खडा किस्मत ले
रहा था....
.
और आज तुझ जेसी
हुस्न वालीयां मेरी
गुलाम की तरह
नाच रही है..
.
इसलीय शायर
खुब कहते है,
.
"हुस्न ना मांग
नसीब मांग ए दोस्त,
हुस्न वाले तो
अक्सर
नसीब वालों के गुलाम
हुआ करते है..


Ek kahani


एक अंधा लड़का एक इमारत की सीढ़ियों पर
बैठा था. उसके पैरों के पास एक
टोपी रखी थी. पास ही एक बोर्ड
रखा था,
जिस पर लिखा था, "मैं अंधा हूँ, मेरी मदद
करो." टोपी में केवल कुछ सिक्के थे.
वहां से गुजरता एक आदमी यह देख कर रुका, उसने
अपनी जेब से कुछ सिक्के निकले और टोपी में
गिरा दिये. फिर उसने उस बोर्ड को पलट कर
कुछ शब्द लिखे और वहां से चला गया. उसने बोर्ड
को पलट दिया था जिससे कि लोग वह पढ़ें
जो उसने लिखा था.
जल्द ही टोपी को भरनी शुरू हो गई. अधिक
से
अधिक लोग अब उस अंधे लड़के को पैसे दे रहे थे.
दोपहर को बोर्ड बदलने वाला आदमी फिर
वहां आया. वह यह देखने के लिए आया था उसके
शब्दों का लोगों पर क्या प्रभाव पड़ा?
अंधे लड़के ने उसके क़दमों की आहट पहचान ली और
पूछा, "आप सुबह मेरे बोर्ड को बदल कर गए थे?
आपने बोर्ड पर क्या लिखा था?"
उस आदमी ने कहा मैंने केवल सत्य लिखा था, मैंने
तुम्हारी बात को एक अलग तरीके से लिखा,
"आज एक खूबसूरत दिन है और मैं इसे नहीं देख
सकता."
आपको क्या लगता है? पहले वाले शब्द और बाद
वाले शब्द, एक ही बात कह रहे थे?
बेशक दोनों संकेत लोगों को बता रहे थे
कि लड़का अंधा था. लेकिन पहला संकेत बस
इतना बता रहा था कि वह लड़का अंधा है.
जबकि दूसरा संकेत लोगों को यह
बता रहा था कि वे कितने भाग्यशाली हैं
कि वे अंधे नहीं हैं. क्या दूसरा बोर्ड अधिक
प्रभावशाली था?
दोस्तों! यह कहानी हमें बताती है कि,
जो कुछ
हमारे पास है उसके लिए हमें
आभारी होना चाहिए. रचनात्मक रहो.
अभिनव रहो. अलग और सकारात्मक सोच रखो.