Monday, 24 August 2015

लेती नहीं दवाई मम्मी ,
जोड़े पाई-पाई मम्मी ।
दुःख थे पर्वत, राई मम्मी,
हारी नहीं लड़ाई मम्मी ।
इस दुनियां में सब मैले हैं,
किस दुनियां से आई मम्मी ।
दुनिया के सब रिश्ते ठंडे,
गरमागर्म रजाई मम्मी ।
जब भी कोई रिश्ता उधड़े,
करती है तुरपाई मम्मी ।
बाबूजी तनख़ा लाये बस,
लेकिन बरक़त लाई मम्मी ।
बाबूजी थे सख्त मगर ,
माखन और मलाई मम्मी ।
बाबूजी के पाँव दबा कर
सब तीरथ हो आई मम्मी ।
नाम सभी हैं गुड़ से मीठे,
मां जी, मैया, माई, मम्मी ।
सभी साड़ियाँ छीज गई थीं,
मगर नहीं कह पाई मम्मी ।
मम्मी से थोड़ी - थोड़ी,
सबने रोज़ चुराई मम्मी ।
घर में चूल्हे मत बाँटो रे,
देती रही दुहाई मम्मी ।
बाबूजी बीमार पड़े जब,
साथ-साथ मुरझाई मम्मी ।
रोती है लेकिन छुप-छुप कर,
बड़े सब्र की जाई मम्मी ।
लड़ते-लड़ते, सहते-सहते,
रह गई एक तिहाई मम्मी ।
बेटी की ससुराल रहे खुश,
सब ज़ेवर दे आई मम्मी ।
मम्मी से घर, घर लगता है,
घर में घुली, समाई मम्मी ।
बेटे की कुर्सी है ऊँची,
पर उसकी ऊँचाई मम्मी ।
दर्द बड़ा हो या छोटा हो,
याद हमेशा आई मम्मी ।
घर के शगुन सभी मम्मी से,
है घर की शहनाई मम्मी ।
सभी पराये हो जाते हैं,
होती नहीं पराई मम्मी


एक औरत को शादी के कई साल बाद ख्याल
आया
कि अगर वो अपने पति को छोड़ के चली जाए
तो
वो कैसा महसूस करेगा।
ये विचार आते ही उसने एक कागज लिया और
उसपे
लिखा ," अब मै तुम्हारे साथ और नहीं रह
सकती,मै उब
गयी हु तुम्हारे साथ से,मै घर छोड़ के जा रही
हु
हमेशा के लिए।"
उस पत्र को उसने टेबल पे रखा और जब पति के आने
का
टाइम हुआ तो उसकी प्रतिकिरया देखने के
लिए बेड
के निचे छुप गयी।
पति आया और उसने टेबल पे रखा पत्र पढ़ा। कुछ
देर
की चुप्पी के बाद उसने पत्र के निचे कुछ
लिखा।
फिर वो खुशी की सिटी बजाने लगा,गीत
गाने
लगा,डांस करने लगा और कपडे बदलने लगा,इसी
दौरान उसने अपने फोन से किसी को फोन
लगाया
और कहा " आज मै एकदम मुक्त हो गया,शायद
मेरी
मुर्ख पत्नी को समझ आ गया की वो मेरे लायक
ही
नहीं थी,आज वो घर से हमेशा के लिए चली
गयी,अब
मै आजाद हु तुमसे मिलने के लिए,मै आ रहा हु कपडे
बदल कर तुम्हारे पास,तुम तैयार हो के मेरे घर के
सामने
वाले पार्क में आ जाओ अभी"
कपडे बदल कर पति बाहर निकल गया, आंसू भरी
आँखों से पत्नी बेड के निचे से निकली और कांपते
हाथो से पत्र के निचे लिखी लाइन पढ़ी
जिसमे
लिखा था....
बेड के नीचे से पैर
दिख रहे है पागल पार्क के पास
वाले
हलवाई से समोसे ले के आ रहा हु तब तक चाय
बना ल


Monday, 3 August 2015

मोदी सरकार को अब दारु दुगुने दाम पर
बेचनी चाहिए !
और आधा पैसा पीने वाले की पत्नी के
अकाउंट में सब्सिडी की तरह वापस कर देना
चाहिए जिससे ये फायदे होंगे !
1. पति लिमिट में पियेगा, क्योंकि उसके नशे
की मात्रा उसकी पत्नी के bank balance के
बराबर रहेगी ।
2. पत्निया अपने पतियों को पीने के लिए
कभी मना नही करेंगी ।
3. पत्नी को मालूम रहेगा, आज पति ने
कितनी पी ।
4. जिस की पत्नी का अकाउंट नहीं है वो
भी खुल जाएगा ।
( हो सकता है किसी किसी की पत्नी को
आयकर - रिटर्न भी दाखिल करना पड़े ।
जन धन दारूबाजी जमा योजना।
आखिर पियेगा इण्डिया तभी तो जियेगा
इंडिया