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Monday, 25 May 2015

अरे हमें तो अपनों ने
लूटा,गैरों में कहाँ दम था.मेरी हड्डी वहाँ
टूटी,जहाँ हॉस्पिटल बन्द था.
मुझे जिस एम्बुलेन्स में
डाला,उसका पेट्रोल ख़त्म था.मुझे रिक्शे में
इसलिए बैठाया,क्योंकि उसका किराया
कम था.
मुझे डॉक्टरों ने
उठाया,नर्सों में कहाँ दम था.मुझे जिस बेड
पर लेटाया,उसके नीचे बम था.
मुझे तो बम से
उड़ाया,गोली में कहाँ दम था.और मुझे सड़क में
दफनाया,क्योंकि कब्रिस्तान में फंक्शन था
अर्ज़ किया हैं...
रोक दो मेरे जनाजे को अब
मुझमे जान आ रही हैं..
आगे से थोडा राईट ले लो
दारु की दूकान आ रही हैं |

"बोतल छुपा दो कफ़न में मेरे,
शमशान में पिया करूंगा,
जब खुदा मांगेगा हिसाब,
तो पैग बना कर दिया करूंगा"
"नशा" "महोब्बत " का हो
"शराब" का हो ...-
या -"facebook " का हो
" होश " तीनो मे खो जाते है
" फर्क " सिर्फ इतना है की,
"शराब" सुला देती है ..
"महोब्बत " रुला देती है ,
- और -
"facebook " यारो की
याद दिला देती है ..!
समर्पित
सभी प्यारें दोस्त के लिए ┓┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈┈
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जाम पे जाम पीने का क्या फ़ायदा?
शामको पी, सुबह उतर जाएगी.
अरे दो बून्द दोस्ती के
पी ले ज़िन्दगी सारी नशे में गुज़र जाएगी...


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